रविवार, 3 जुलाई 2011

jaadukalaa

हमें याद है वे पल जब हम आदरणीय प्रोफ़ेसर पदम् चंद जैन जी से मिले थे उस समय जादू कला का प्रारूप हमारे दिमाग में प्रेत-साधना था. मेरे साथ मेरे आदर योग्य डाक्टर सतवंत सिंह जी मेरे साथ थे.
जैन साहब ने हमारी संशय का समाधान कुछ जादू दिखा कर किया तब हमने जाना कि जादुकला एक हाथ की सफाई से ज्यादा कुछ नहीं.  हमारी जिज्ञासा और बढ़ गई फिर हमारे जैन साहब के मार्गदर्शन में जादुकला का अभ्यास आरम्भ किया.

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